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manoj
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Post by manoj » Fri Dec 21, 2018 4:19 pm

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Re: INC_Translations

Post by manoj » Wed Jan 02, 2019 4:28 pm

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manoj
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Post by manoj » Wed Jan 02, 2019 4:33 pm

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manoj
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Re: INC_Translations

Post by manoj » Fri Jan 04, 2019 1:55 pm

देश के युवाओं, किसानों राफेल मामले पर संसद में चर्चा हुई, 30,000 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री जी ने अनिल अंबानी जी को दिलवाये। जब संसद भवन में चर्चा हुई तो प्रधानमंत्री जी संसद में नहीं थे और प्रधानमंत्री जी राफेल चर्चा से भाग गये
अरुण जेटली जी ने लंबा भाषण दिया, गाली दी मुझे मगर जो सवाल हैं उनका जवाब नहीं दिया
मैं प्यार से दोहराना चाहता हूं कि राफेल मामले पर 4-5 सवाल हैं
पहला सवाल - हवाई जहाज की कीमत को 526 करोड़ रुपये से 1600 करोड़ रुपये किसने बढ़ाया। क्या वायुसेना के लोगों ने दाम बढ़ाया या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वयं दाम बढ़ाया?
दूसरा सवाल - वायुसेना को 126 जहाज चाहिए थे लेकिन 36 हवाई जहाज का कांट्रैक्ट तैयार किया। क्या वायुसेना ने 36 हवाई जहाज मांगे थे या 126 हवाई जहाज मांगे थे?
तीसरा सवाल - अनिल अंबानी को कांट्रैक्ट किसने दिलवाया? ओलांद जी ने कहा है कि अनिल अंबानी को कांट्रैक्ट नरेन्द्र मोदी जी ने दिलवाया। दसॉल्ट कंपनी की आंतरिक ईमेल्स में कहा गया है कि उनको आर्डर मिला था कि हिंदुस्तान की सरकार और प्रधानमंत्री ने कहा था कि अनिल अंबानी को कांट्रैक्ट दिया जायेगा
पूरा विपक्ष चाहेगा कि जब रक्षा मंत्री प्रधानमंत्री की तरफ से बोलेंगी तो इन सवालों का जवाब दिया जाए
36 हवाई जहाज वाली जो नयी डील बनाई गयी उस डील पर हिंदुस्तान की वायुसेना के लोगों को क्या एतराज था? हां या ना!
कहीं किसी फाईल में लिखा है कि रक्षा मंत्रालय नयी डील पर आपत्ति दर्ज कर रहा है। रक्षा मंत्री को हमें ये बताना है कि ऐसी कोई फाइल नहीं है जिसमें साफ लिखा है कि नये सौदे पर बातचीत करने वाली टीम आपत्ति कर रही है
अरुण जेटली जी ने कहा है कि राहुल गांधी गलत सवाल पूछ रहे हैं। 526 करोड़ रुपये का जहाज अगर 1600 करोड़ रुपये में खरीदा जाता है क्या ये गलत सवाल है कि ये क्यों खरीदा गया?
क्या ये गलत सवाल है कि एचएएल को परे करके अनिल अंबानी को किस आधार पर कांट्रैक्ट क्यों दिया गया?
क्या ये गलत सवाल है कि हिंदुस्तान में इंडस्ट्री बननी चाहिए लेकिन आपने दूसरे देश में बना दी है?
अरुण जेटली जी को मुझे गाली देना बंद करना चाहिए और सवालों का जवाब देना चाहिए। बुनियादी सवाल ये है कि जेपीसी जांच होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहीं नहीं कहा कि जांच नहीं होनी चाहिए
हम यदि 2019 में सत्ता में आये तो इस मामले की आपराधिक जांच होगी और जो लोग इसके लिये जिम्मेदार होंगे उनको सजा दिलवायी जायेगी
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मैं मौजूदा रक्षा मंत्री या पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर जी पर आरोप नहीं लगा रहा हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगा रहा हूं
अनिल अंबानी को ऑफसेट कांट्रैक्ट का सबसे बड़ा पार्ट मिला। रक्षा मंत्री ने 2 घंटे से ज्यादा लंबा भाषण दिया, लेकिन अनिल अंबानी जी का एक बार भी नाम तक नहीं लिया।
अनिल अंबानी को लाने का निर्णय किसने किया, ओलांद जी ने कहा था कि अनिल अंबानी को लाने का निर्णय प्रधानमंत्री जी ने किया। रक्षा मंत्री जी ने इसका जवाब नहीं दिया
रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि नरेन्द्र मोदी जी ने इमरजेंसी के चलते बायपास सर्जरी करके पुरानी डील को बदला। क्या रक्षा मंत्रालय के उच्चाधिकारियों ने मोदी जी की इस बायपास सर्जरी पर आपत्ति जताई?

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manoj
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Post by manoj » Tue Jan 15, 2019 5:50 pm

सीबीआई बनाम सीबीआई: भारतीय लोकतंत्र के संकट का मामला
23-24 अक्टूबर, 2018 की दरम्यानी रात को मोदी सरकार ने भारतीय लोकतंत्र पर अपने सबसे घातक हमलों में से एक को अंजाम दिया। उसने यह दावा किया कि दोनों अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान से संस्थान की अखंडता को खतरा पैदा हो गया है और फिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा सहित विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के सारे अधिकार छीनते हुए उन्हें जबरन उनके पदों से हटा दिया।
इस आपसी खींचतान की पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो अगस्त 2017 की शुरुआत में अस्थाना का नाम एक हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले में सामने आया था। अस्थाना पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते तत्कालीन निदेशक वर्मा के कड़े विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने अक्टूबर 2017 में अस्थाना को सीबीआई में विशेष निदेशक नियुक्त कर दिया। इसने वर्मा और अस्थाना के बीच सीबीआई में अंदरुनी टकराव शुरू हो गया और वे एक दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पलटवार करने लगे, वर्मा जहां अस्थाना के खिलाफ मामलों की जांच करते थे और अस्थाना की वर्मा के खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को शिकायत करते थे।
दरअसल पूरे मामले में तब नया मोड़ आ गया और ये खासा चर्चित हो गया जब अक्टूबर 2018 में प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा सीबीआई निदेशक से मिले और राफेल विमान सौदे व ऑफसेट अनुबंध में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने का अनुरोध किया, जिसमें अनिल अंबानी को अवैध तरीके से फायदा पहुंचाया गया था। भूषण, शौरी और सिन्हा की तिकड़ी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की जरुरत बताते हुए तमाम दस्तावेजों के साथ विस्तृत शिकायत दर्ज करायी।
मीडिया में आने वाली खबरों में दावा किया गया कि सरकार सीबीआई में चल रही इन चीजों से नाखुश थी। हालात तब और बिगड़ गये, जब अस्थाना के खिलाफ घूसखोरी के मामले में आधिकारिक तौर पर सीबीआई ने केस दर्ज किया और अन्य अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि वर्मा ने रक्षा मंत्रालय से राफेल सौदे से संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित करने का अनुरोध किया।
अपने पैरों के नीचे की जमीन खिसकती देख पीएम मोदी ने एक तरह से तख्तापलट करते हुए असंवैधानिक रूप से वर्मा सहित अस्थाना को आधी रात को उनके पद से हटा दिया और दावा किया कि उनके झगड़े के कारण संस्थान साख को गंभीर खतरा पैदा हो गया था, जबकि असल में डर पीएम मोदी को था कि अगर वर्मा तक राफेल सौदे के दस्तावेजों की पहुंच हो गयी तो उससे मोदी जी को खतरा पैदा हो जाता।
प्रधानमंत्री की इस असंवैधानिक कार्रवाई का असर ये हुआ कि सीबीआई का शीर्ष स्तर लगभग बर्बाद हो गया, क्योंकि प्रमुख मामलों की जांच करने वाले दल भंग कर दिये गये, महत्वपूर्ण अधिकारियों को अंडमान और दूर-दराज के इलाकों में स्थानांतरित कर दिया गया तथा सीबीआई भवन सील कर दिया गया।
वर्मा खुद को गलत तरह से हटाये जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये और सुप्रीम कोर्ट ने उनके तख्तापलट को असंवैधानिक मानते हुए दोबारा निदेशक के पद पर उनको बहाल कर दिया, ये प्रधानमंत्री के लिये तगड़ा झटका था, सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा का भाग्य उच्चाधिकार प्राप्त समिति के हाथ में सौंप दिया, जिसमें कानून के अनुसार प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि शामिल थे।
सीबीआई निदेशक के तौर पर वर्मा की बहाली के संभावित परिणामों से बुरी तरह डरे पीएम ने बिना एक पल की देरी किये तुरंत नियुक्ति समिति की बैठक बुलाई और वर्मा को उनके पद से दोबारा हटा दिया। वर्मा के खिलाफ बिना किसी पुख्ता सबूत के भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली सीवीसी की आधी-अधूरी रिपोर्ट कमेटी के सामने रखी गयीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने वर्मा को हटाने का विरोध करते हुए अपनी लिखित असहमति दर्ज करायी।
इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस ए.के. पटनायक, जिन्हें सीवीसी जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था, ने कहा कि वर्मा के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं’ था और सीवीसी ने जो कहा उसे अंतिम नहीं माना जा सकता।’’ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल करने के महज दो दिन बाद ही हटाने वाली नियुक्ति समिति की आलोचना करते हुए कहा कि पीएम की अगुवाई वाली समिति ने बेहद, बेहद जल्दबाजी में फैसला किया।’’
वर्मा को उचित सुनवाई के बिना बर्खास्त करने का फैसला करने की आखिर क्या जल्दी थी? वर्मा को सिर्फ 3 सप्ताह के लिए अपने संवैधानिक कर्तव्यों को जारी रखने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती थी? प्रधानमंत्री को किस बात का डर सता रहा था? क्या इस तरह से संस्थान की अखंडता की रक्षा हो रहा है क्योंकि उनका ही ऐसा दावा है या फिर ये राफेल सौदा है जिसे वो नहीं चाहते कि उसकी काफी बारीकी से जांच-पड़ताल हो?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब मौजूदा सरकार को देना चाहिए, जिसने किसी न किसी तरह से अपने राजनीतिक फायदे के लिए स्वतंत्र संस्थानों पर हमला करना अपनी आदत बना ली है। भारतीय रिजर्व बैंक से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से लेकर न्यायपालिका तक, पीएम मोदी ने यह साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि वो किसी भी संस्था द्वारा उनके खिलाफ किसी भी तरह की असहमति को बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्या ये लोकतंत्र की पहचान है या तानाशाही की है?
कोई इस बात को समझने में गलती न करें कि इस तरह की घटनाएं भारतीय लोकतंत्र की नींव पर एक बड़े हमले का हिस्सा हैं, जो मोदी सरकार की हरकतों के कारण अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं पर आज मौजूदा सरकार की तरफ से ही खतरा पैदा हो गया है और हमें इससे लड़ने के लिए हर संभव कोशिश करने की जरूरत है।

manoj
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Re: INC_Translations

Post by manoj » Thu Jan 24, 2019 5:04 pm

श्री राहुल गांधी
राहुल गांधी का जीवन परिचय: शिक्षा, राजनीति, व्यक्तिगत जीवन

राहुल गांधी का जीवन परिचय
श्रीमती सोनिया गांधी एवं श्री राजीव गांधी की संतान राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को हुआ था। वर्तमान में वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राहुल गांधी के पास भारतीय युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के संरक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी हैं। इससे पहले श्री गांधी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के पद पर भी काम कर चुके हैं। राहुल गांधी वर्ष 2004 से लगातार लोकसभा में बतौर सांसद उत्तर प्रदेश के अमेठी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राहुल गांधी 16 दिसंबर, 2017 को पार्टी की कमान संभालने से पहले जनवरी 2013 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। उन्होंने गृह मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति के सदस्य और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य किया है। मौजूदा समय में वे विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। राहुल गांधी, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी भी हैं।

राहुल गांधी का शुरुआती जीवन
शुरुआती दिनों में राहुल गांधी सार्वजनिक तौर पर कम ही नज़र आते थे। राहुल गाँधी अपने परिवार की देख-रेख में पले-बढ़े, उनकी देखभाल में उनकी मां श्रीमती सोनिया गांधी का बेहद खास योगदान रहा। छात्र जीवन में राहुल गांधी ने अपना पूरा ध्यान अपनी शिक्षा पर केंद्रित किया। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विदेश गये। उम्दा शिक्षा हासिल करने की उनकी ललक के बीच उन्हें सुरक्षा से जुड़े कई सारे खतरों का भी सामना करना पड़ा जो कि उनके पिता और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की अमानवीय हत्या के बाद पैदा हो गये थे। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद, राहुल गांधी ने लंदन स्थित एक प्रबंधन परामर्शदाता फर्म मॉनिटर ग्रुप के साथ अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे भारत लौट आये और मुंबई में बैकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक एक प्रौद्योगिकी आउटसोर्सिंग फर्म की स्थापना की, जहां वे निदेशकों में से एक थे।

राहुल गांधी की शिक्षा-दीक्षा
राहुल गांधी का बचपन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और देहरादून की शांत पहाड़ियों में बीता। नयी दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़ने के बाद राहुल गांधी का दाखिला उत्तराखंड के दून स्कूल में कराया गया, जहां वे 1981 से 1983 तक पढ़े। राहुल गांधी के पिता श्री राजीव गांधी को उस वक्त राजनीति में आना पड़ा और वे 31 अक्टूबर, 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने। स्वर्गीय इंदिरा गांधी के परिवार पर लगातार सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी को बाद में घर पर ही स्कूली शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी। राहुल गांधी ने उच्च शिक्षा के लिये अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय जाने से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। 1991 में देश ने भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी की एक चुनावी रैली के दौरान बर्बर हत्या का मंजर देखा, जिसमें वो शहीद हो गये। उनके पिता की असामयिक मृत्यु के बाद सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण राहुल गांधी फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज चले गये, जहां उन्होंने 1994 में स्नातक की उपाधि हासिल की। उन्होंने वर्ष 1995 में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल की पढ़ाई पूरी की।

राहुल गांधी का राजनीतिक सफ़र
मार्च 2004 में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सक्रिय होने की घोषणा की। अपने पिता स्वर्गीय राजीव गांधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ते हुए राहुल गांधी ने एक लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से शानदार जीत दर्ज करायी। इसके तुरंत बाद, राजनीतिक उम्मीदवार के तौर पर विदेशी मीडिया को दिये अपने पहले साक्षात्कार में राहुल गांधी ने कुछ दलों की विभाजनकारी राजनीति की निंदा की और वादा किया कि वो सभी समुदायों और दलों के बीच आपसी भाईचारा और समन्वय बनाने का काम करेंगे तथा जाति और धर्म के आधार पर जो तनाव पैदा हुआ है उसे मिटाने की कोशिश करेंगे। पार्टी पदाधिकारियों के काम में फेरबदल के दौरान 24 सितंबर को राहुल गांधी को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और भारतीय युवा कांग्रेस की जिम्मेदारी को भी संभाला, उनके कुशल नेतृत्व में इन दोनों संगठनों में व्यापक बदलाव और वृद्धि देखने को मिली। जनवरी 2013 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष के रूप में कमान सौंपी गयी। अपने राजनैतिक सफर के दौरान राहुल गांधी ने लगातार वंचितों और समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया। 11 मई, 2011 को उत्तर प्रदेश के भट्टा पारसौल गाँव में पुलिस ने उन्हें प्रदर्शनकारी किसानों की मांगों का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार कर लिया था। किसान एक राजमार्ग परियोजना के लिये अधिकारियों द्वारा अपनी जमीन का अधिग्रहण किये जाने के एवज में उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे। राहुल गांधी ने 2014 के आम चुनाव में अमेठी संसदीय क्षेत्र से लगातार तीसरी जीत हासिल की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार को एक लाख सात हजार नौ सौ तीन मतों के बड़े अंतर से हराया। यह बड़ा अंतर अमेठी के आम लोगों का राहुल गांधी और उनके काम पर जताये गये भरोसे का प्रतीक है। राहुल गांधी ने देश की भलाई के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखी और अथक परिश्रम से अपना काम करते रहे। वर्ष 2017 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। उनके नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सामने सशक्त और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका प्रस्तुत की है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी
राहुल गांधी को 16 दिसंबर, 2017 के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी। उनका नेतृत्व केन्द्र की एनडीए सरकार के खिलाफ विपक्ष की मजबूत आवाज बनकर उभरा है। राहुल गांधी ने सबसे बड़े विपक्षी दल के अध्यक्ष के तौर पर आम जनहित से जुड़े कई मुद्दों को उठाया है, जिनमें मुख्य तौर पर समाज के वंचित वर्गों की बेहतरी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। विपक्षी दल का अध्यक्ष होने के नाते, राहुल गांधी ने देश के विभिन्न हितधारकों की मांगें पुरजोर ढंग से उठाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने गरीबों और वंचितों के अधिकारों का समर्थन किया और मौजूदा सरकार की खराब ढंग से लागू नीतियों जैसे 2016 में बिना सोचे-समझे लागू की गयी नोटबंदी जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, हर व्यक्ति के लिये आधार नामांकन को बाध्यकारी बनाना, खराब तरीके से लागू जीएसटी, तेल के बढ़ते दाम, भारत के लोगों को आपस में बांटने वाली राजनीति, स्वच्छ भारत योजना की विफलता सहित राफेल घोटाले के खिलाफ मुखरता से अपनी आवाज़ बुलंद की। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार द्वारा करीबी पूंजीपतियों, अमीर उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का हित साधने तथा देश के गरीबों, किसानों और कमजोर वर्गों की कठिनाईयों को नज़रअंदाज करने पर जमकर आलोचना की। लोकतांत्रिक लड़ाई को प्यार और भाईचारे के साथ लड़ने की राहुल गांधी की सोच और उनकी रणनीति ने कांग्रेस पार्टी को एकजुट भारत का सच्चा प्रतिनिधि बनाया। भविष्य में, उनका लक्ष्य ऐसी प्रणालियां विकसित करके इन सिद्धांतों को अमली जामा पहनाना है, जो भारत के नागरिकों को अपना पूर्ण सामर्थ्य हासिल करने के लिये जरुरी साधन और अवसर उपलब्ध कराये।

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manoj
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Re: INC_Translations

Post by manoj » Wed Mar 06, 2019 3:34 pm

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Re: INC_Translations

Post by manoj » Fri Mar 08, 2019 6:46 pm

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